मौसम

एक बूँद गिरी मेरे बदन पर. तो लगा शायद बिल्डिंग के नीचे खड़ा हू तो किसी ने पानी डाला होगा. या फिर पेड़ पोधो को डालने वाला पानी गिरा होगा. पर उपर देख ही लेना चाहिए कुछ भरोसा नही है लोगो का कभी कभी मूह से भी पिचकारी उड़ाते है.

Sunday, March 27, 2011

PATH

पथ..........(रोड) जिसे आम जिंदगी मैं रास्ता काहेते है...जिंदगी की सुबह ईसी पर पाव रख के खड़े होके होती है और रात को भी उसी रास्ते पे सोते हुवे ख़तम होती है. हर किसी की मंज़िले ईसी रस्ते ने जोड़ी हुई है. जहा भी जाना है ये रास्ता आप को वही लेजता है. जिंदगी की तरह ये भी नये नये सर्प्राइज़ देता रहेता है. कभी किसी मोड़ पेर मूड जाके, तो कभी नज़रे जहा तक...

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