मौसम

एक बूँद गिरी मेरे बदन पर. तो लगा शायद बिल्डिंग के नीचे खड़ा हू तो किसी ने पानी डाला होगा. या फिर पेड़ पोधो को डालने वाला पानी गिरा होगा. पर उपर देख ही लेना चाहिए कुछ भरोसा नही है लोगो का कभी कभी मूह से भी पिचकारी उड़ाते है.

Tuesday, April 12, 2011

समय ....वक़्त.

समय ....वक़्त.. टिक टिक चलता हुवा ये वक़्त , कभी ना थामता हुवा, कभी ना रुकता हुवा. जिंदगी को अपने साथ लेता हुवा गुज़र ता रहेता है ये वक़्त...... कुछ उजलीसी किरनो के साथ सूरज को अपनी पनहा मैं लेके दिन की शुरुआत करता ये वक़्त.... तपती धूप मे खाने पिरोस ता तो कभी लोगो को अंगड़ाई दिलाता ये वक़्त. शाम के मौसम मैं सूरज को अपनी बहो मैं समेट ता हुवा ये वक़्त.. रात के आँचल मैं चुपके से छुप जाता ये वक़्त.कुछ अपना सा  कुछ बेगाना सा है ये वक़्त, हर किसी की ज़रूरत है ये वक़्त.. हर किसी को अपने बस मैं...

Page 1 of 612345Next