मौसम

एक बूँद गिरी मेरे बदन पर. तो लगा शायद बिल्डिंग के नीचे खड़ा हू तो किसी ने पानी डाला होगा. या फिर पेड़ पोधो को डालने वाला पानी गिरा होगा. पर उपर देख ही लेना चाहिए कुछ भरोसा नही है लोगो का कभी कभी मूह से भी पिचकारी उड़ाते है.

Saturday, June 18, 2016

ना बारिश आ रही थी ना वो। बादल आसमान में छाये तो थे पर कब बरसेंगे वो राज़ था । बीलकुल मेरी प्रियतमा के जैसे, आज उनकी एक जलक दिखेगी या नहीं ,उनकी नज़रे मुझसे मिलेगी या नहीं, बस ये सवाल आँखोंमें लिये कॉलेज के परिसर में खड़ा था। कभी उस ऊँची ईमारत को देखता तो कभी बादलो को। ये समय गुज़र क्यों नहीं रहा था बार बार नज़र जभी घडी पर जाती लगता जाने फेविकॉल लगा के कांटे रुक गये हे। बस बार बार 11.57 ही दिखाते है। दो तिन् बार घडी टटोल ली , नज़रे साफ़ करली पर समय वही का वही still rock. कुछ लड़के सिगरेट पि रहे थे । श्वेत...

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